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शुक्रवार, 20 मई 2016

धर्म बलिदानी वीर हकीकत राय

!!!---: धर्म बलिदानी वीर हकीकत राय :---!!!
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हकीकत राय एक वीर साहसी बालक था जिसने हिन्दू धर्म के अपमान का प्रतिकार किया और जबरन इस्लाम स्वीकारने के बजाय मृत्यु को गले लगा लिया।

परिचय
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पंजाब के सियालकोट में सन् 1719 में वीर हकीकत राय का जन्‍म हुआ था । इनके पिता श्री भागमल थे । ये बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के बालक थे। हकीकत राय नाम का बालक था धर्म परायण और वीर। यह बालक 4-5 वर्ष की आयु मे ही इतिहास तथा संस्‍कृत आदि विषय का पर्याप्‍त अध्‍ययन कर लिया था। 10 वर्ष की आयु मे फारसी पढ़ने के लिये मौलबी के पास मस्जिद मे भेजा गया । उस समय मुगलों का राज़ था। इसलिए हर जगह मुसलमानों की ही चलती थी ।

विवाद
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वहॉं के मुसलमान छात्र हिन्‍दू बालको तथा हिन्‍दू देवी देवताओं को अपशब्‍द कहते थे। बालक हकीकत उन सब के कुतर्को का प्रतिवाद करता और उन मुस्लिम छात्रों को वाद-विवाद मे पराजित कर देता।

एक दिन साथ के कुछ मुस्लिम बच्चे उसे चिढाने के लिए हिंदू देवी देवताओ को गाली देने लगे । उस सहनशील बालक ने कहा अगर यह सब मैं बीबी फातिमा के लिए कहू तो तुम्हें कैसा लगेगा।

इतना सुन कर मुस्लिम बच्चों ने हल्ला मचा दिया कि हकीकत ने फातिमा बीबी को गाली दी है । मुसलमान उस्ताद ने इसकी शिकायत बडे लोगों से कर दी । अब बात छोटे स्तर की नहीं रही । अब हिन्दू-मुसलमान की बात आ गई । बड़े काजी ने फ़ैसला सुनाया कि या तो इस्लाम स्वीकार कर लो या फिर मर जाओ । उस बालक ने बडी निर्भीकता से कहा, "मैंने गलत नहीं की तो मैं इस्लाम क्यों स्वीकार करूँगा।"

मृत्युदण्ड
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बालक के परिजनों के द्वारा लाख सही बात बताने के बाद भी काजी ने एक न सुनी और निर्णय सुनाया कि शरिया के अनुसार इसके लिये सजा-ए-मौत है या मुसलमान हो जाए ।

माता पिता व सगे सम्‍बन्धियों ने वीर हकीकत को बहुक समझाया कि मेरे लाल मुसलमान बन जा तू कम-से-कम जिन्‍दा तो रहेगा । किन्‍तु वह बालक अपने निश्‍चय पर अडि़ग रहा और बंसत पंचमी सन 1734 को मुसलमान जल्‍लादों ने उसे फॉंसी दे दी। इस प्राकर एक 10 वर्ष का बालक अपने धर्म और देश के लिये शहीद हो गया ।।

आज भी उनकी समाधि लाहौर से दो मील दूर पूर्व की दिशा में बनी हुई है । धर्म पर बलिदान होने वाले वीर हकीकत को हमारा नमन
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