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रविवार, 22 मई 2016

अंग्रेजों के अत्याचार

!!!---: अंग्रेजों के अत्याचार :---!!!
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नमस्ते पर मारे गए
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भारतीय कैदी यदि किसी अंग्रेज अधिकारी को नमस्ते करता तो उस पर भी मार पडती थी । अंग्रेज अधिकारी अपने लिए तौहीन समझते थे कि कोई भारतीय कैदी उसे नमस्ते करे ।राजनैतिक कैदी इस लायक भी नहीं ,मझे जाते थे कि उनका नमस्ते लिया जाए । यदि किसी की तबियत खराब हो, और वह खाना न खाता हो तो उस पर भी मार पडती थी । इलाहाबाद के जमुना प्रसाद, रीमचन्द्र,, जगन्नाथ, मेरठ के मिट्ठनलाल और कामता प्रसाद पर कई बार मार पडी ।

काम न करने पर मारे गए
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मैनपुरी के सरदार मन्नासिंह पर इस कारण मार पडी कि वे जेल की मशक्कत पूरी न कर सके । इस पर प्रतिवाद में वह अनशन करते रहे । कई मौकों पर पूरी मशक्कत करने वाले राजबन्दी भी इस कारण मारे गए कि उन्होंने खुद तो काम किया, पर वे अपने साथियों से काम कराने में असमर्थ रहे ।

रामदत्त शुक्ल जेलर
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ये सारे अत्याचार रामदत्त शुक्ल जेलर के जमाने में हुए । मजे की बात यह है कि रामदत्त शुक्ल के छोटे भाई श्री जगदीश शुक्ल एक क्रान्तिकारी रहे । रामदत्त शुक्ल की हृदयहीनता का परिचय इसी से मुलेगा कि उसने अपने छोटे लडके को पुलिस की इस शिकायत पर हमेशा के लिए घर से निकाल दिया कि उसने किसी राजनैतिक जुलूस में भाग लिया था और यह बेचारा दाने-दाने को मुहताज हो गया । रामदत्त शुक्ल के बाद अजीनतुल रहमान जेलर होकर आए, पर वह भी रामदत्त की लीक पर चलते रहे ।

मुफ्त में बेंत
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इसी जेल में अनुशासन भंग के कारण कामपुर के शिवरामसिंह , रामराखन, मन्नालाल द्विवेदी, इटावा के राधाकृष्ण और कन्हैयालाल, बनारस के देवनन्दन दीक्षित, मिरजापुर के बिहारीराय, नैनीताल के दलीपसिंह को अनुशासन भंग करने पर सात-सात बेंत लगे । असल में इनको बेंत इस कारण लगे कि इन्होंने जेलों के आई.जी. के आते समय परेड पर खडे होने से इन्कार किया था ।



ये सारी घटनाएँ फतेहगढ सेण्ट्रल जेल की हैं ।
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