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बुधवार, 30 मार्च 2016

बिहार में शराबबन्दी या कुछ और.....

!!!---: बिहार में शराबबन्दी या कुछ और :---!!!
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बिहार में एक अप्रैल से देसी शराब की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है. वहीँ नई उत्पाद और मद्य नीति के तहत विदेशी शराब की बिक्री को भी चिह्नित कर दिया गया है ।

पहले चरण में देसी-मसालेदार शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए जो भी आवश्यक क़दम है, उसे पूरा किया जा चुका है ।

बिहार सरकार का छुपा हुआ कार्यक्रम है , जिसके अन्तर्गत सभी देशी शराब की दुकानों को बन्द करना है । इसके स्थान पर कुछ गिनी चुनी विदेशी कम्पनियों की शराब बिकेंगी ।

कुछ बडी विदेशी शराब कम्पनियाँ सरकार पर दबाव बनाकर और कुछ पैसे देकर देशी कम्पनियों को बन्द कराने के लिए कानुन बनवाया और अपनी शराब को बेचने का कार्यक्रम तैयार किया है ।

जो स्थानीय लोग शराब बेचकर अपना पेट पाल रहे थे, अब वे बेरोजगार हो जाएँगे । अब वे पेट पालने के लिए चोरी आदि कुकर्म करेंगे ।

अपने देश में इस प्रकार का कार्यक्रम पिछले 65 सालों से चल रहा है । सरकारें देशी कम्पनियों का नुकसान करके विदेशी कम्पनियों से पैसा खाकर उन्हें बढावा देती है ।

कहा तो ये जा रहा है, अगले वर्ष पूर्ण शराबबन्दी होगी । इसका क्या अभिप्राय है । यही कि पूरे नौ महीने विदेशी शराब बिहार में परोसी जाएगी । इन नौ महीनों में विदेशी कम्पनियाँ चाँदी कुटेंगी ।

सबसे बडी बात ये होगी कि सरकार खुद विदेशी बेचेगी । मतलब ये कि तेरी भी दीवाली और मेरी भी । तू भी लूट, मैं भी लुटूँगा । मतलब ये कि इन्हें लूटकर और गरीब बनाना है ।

यदि सरकार की मंशा (इच्छा) बिहार की जनता की भलाई ही करनी थी तो नौ महीने का लम्बा समय क्यों दिया । आप एक अप्रैल से पूर्ण शराबबन्दी कर देते ।

ऐसा न करके गोलमाल किया है ।

विदेशी शराब बनाने वाली एक बडी कम्पनी के अधिकारी खुद दावा किया है कि सरकार विदेशी शराब को बन्द नहीं कर सकती । इसका मतलब क्या है, यही कि उसने जो पैसे खर्च किए वे इन नौ महीनों में कमा लेगा ।

नीतीश कुमार ने चुनाव के समय यह घोषणा की थी कि पूर्ण शराबबन्दी होगी तो फिर सरकार क्यों विदेशी कम्पनियों को छूट दे रही है ।



सरकार अब पलट गई है, आखिर क्यों, चुनाव के बाद से लेकर अब तक बहुत बदलाव आ चुका है । इस बीच में विदेशी कम्पनियों ने सरकार पर दबाव बना लिया ।


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