!!!---: फेसबुक की बदतमीजी :---!!!
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दोस्तों, मैं कई पोस्टों में फेसबुक और उसके मालिक मार्क जुकरबर्ग के रहस्मयी खुलासों को आपके सामने प्रकट करता रहा हूँ । फ्री इण्टरनेट सेवा के लिए आप सबने बिना सोचे-समझे समर्थन किया था । फेसबुक बडे जोरदार ढंग से एक कैंपेन चलाया था और आप सबसे से समर्थन माँगा था , किन्तु असलियत आपसे छिपायी गई , जिसके कारण आप सबने समर्थन किया था, जबकि इसके पीछे बहुत बडा रहस्य था । वह रहस्य गत पोस्ट में आप पढ सकते हैं । मार्क जुकरबर्ग के कैंपेन को धराशायी कर ट्राई के निदेशक आर.एस. शर्मा ने । हमें आशा थी कि ऐसा ही होगा । श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए कि भारत गुलामी की तरफ बढे ।
आपको पता है कि ट्राई ने जब फेसबुक के "फ्री बेसिक्स" प्लान को खारिज कर दिया तो फेसबुक के अधिकारी तिलमिला गए और अपनी साम्राराज्यवादी मानसिकता को जाहिर कर दिया । फेसबुक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल मार्क एण्ड्रीसन ने भारत के प्रति अपनी नीच सोच को जाहिर किया है । उसने 11 फरवरी को ट्वीट किया है । भारत को आजादी मिली तो गलत मिली है यह गुलाम ही रहता तो अच्छा रहता । जिससे फेसबुक का प्लान पास हो जाता । भारत ने गुलामी में बडी आर्थिक हानि उठायी है, तो हमारे प्लान को क्यों रोक दिया है ।
मार्क के इस बय़ान का विरोध शुरु हो गया है । उसे अहसास हुआ है कि उसने गलत बयान दे दिया है । इसके बाद उसने अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया है । उसने अब ट्वीट किया है कि वह भारतीय अर्थव्यवस्था या राजनीति पर किसी से बहस नहीं करेगा ।
दोस्तों, उसने बेशक अपना बयान वापस ले लिया हो , लेकिन है यह बेहद ही खौफजदा । आप याद करें, यही अमेरिका है जब 65 सालों से भारत को बेवकुफ बना रहा है । आपको शायद पता नहीं होगा, कि अंग्रेज भारत को बिना शर्त आजाद कर रहा था, किन्तु अमेरिका के कहने पर भारत को शर्तों के साथ आजादी मिली । अमेरिका ने इंग्लैण्ड के साथ मिलकर एक बिल बनवाया कि भारत ने आजादी प्राप्त नहीं की, अपितु इंग्लैण्ड उसे आजादी है । इस बिल का अभिप्राय यही है कि इंग्लैण्ड जब शक्तिशाली होगा और जब चाहेगा तो बिल का हवाला देकर हमसे आजादी छिन सकेगा । यह अमेरिका की दोगली नीति है ।
11 फरवरी को दिए बयान पर मार्क जुकर्बर्ग को भी एहसास हुआ , उसने 12 फरवरी को माफी माँगी है । उसने एण्ड्रीसन के बयान से अपने-आपको अलग कर लिया है । उसने कहा है कि एण्ड्रीसन की टिप्पणी बेहद परेशान करने वाली है और यह कम्पनी के विचार नहीं है ।
दोस्तों, हम आपसे अपील करते हैं कि हमें एण्ड्रीसन का विरोध करना चाहिए अपने-अपने स्तर पर । यदि नरेन्द्र मोदी भी इसका विरोध करे, तो सही विरोध होगा ।
विरोध का एक अन्य तरीका यह भी हो सकता है, कि अमेरिकी कम्पनियों के उत्पाद को छोड़ दें । विशेष कर खाद्य वस्तुओं का तो प्रयोग करें ही नहीं और स्किन से सम्बन्धित उत्पादों का प्रयोग बन्द कर दें । अमेरिका सबक सीखाना चाहिए ।
अमेरिका हमें अभी भी गुलाम बनाना चाहता है । इस सोच के साथ आपको विरोध करना चाहिए ।
इस पोस्ट को अधिक-से-अधिक संख्या शेयर करें और मित्रों को आमन्त्रित करें ।
श्री राजीव दीक्षित जी को नमन, जिन्होंने हमें ऐसी सोच दी ।
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