www.vaidiksanskrit.com

सोमवार, 22 फ़रवरी 2016

कैप्सूल का सच

!!!---: कैप्सूल का सच :---!!!
==========================
www.vaidiksanskrit.com

मित्रों !!! आयुर्वेद को छोड़ कर जितनी भी चिकित्सा पद्धतियाँ है उनमे बनने वाली औषधियों मे बहुत अधिक मांसाहार का प्रयोग होता है ,आप जितनी भी एलोपैथी ओषधियाँ लेते है उन मे जो कैप्सूल होते है वो सब के सब मांसाहारी होते हैं ।


दरअसल कैप्सूल के ऊपर जो कवर होता है उसके अंदर औषधि भरी जाती है
वो कवर प्लास्टिक का नहीं होता आपको देखने मे जरूर लगेगा कि ये प्लास्टिक है लेकिन वो प्लास्टिक का नहीं है क्योंकि अगर ये प्लास्टिक का होगा तो आप उसको खाओगे तो अंदर जाकर घुलेगा ही नहीं ,क्योंकि प्लास्टिक 400 वर्ष तक घुलता नहीं है , वो कैप्सूल ऐसे का ऐसे सुबह टॉइलेट के रास्ते बाहर आ जाएगा ।


तो मित्रो !!! ये जो कैप्सूल के खाली कवर जिस कैमिकल से बनाये जाते हैं, उसका नाम है gelatin (जिलेटिन ) । जिलेटिन से ये सब के सब कैप्सूल के कवर बनाये जाते है ,और जिलेटिन के बारे मे आप सब जानते है और बहुत बार आपने मेनका गाँधी के मुँह से भी सुना होगा की जब गाय के बछड़े या गाय को कत्ल किया जाता है , उसके बाद उसके पेट की बड़ी आंत से जिलेटिन बनाई जाती है तो ये सब के सब कैप्सूल मांसाहारी होते है ।


आप चाहे तो मेरी बात पर विश्वास ना करें आप google पर (capsules made of ) लिख कर search करें । 1 नहीं 2 नहीं सैंकड़ों link आपको मिल जाएँगे ,
जिससे आपको स्पष्ट हो जाएगा कि कैप्सूल जिलेटिन से बनाये जाते है ।


मित्रों !!! आपने एक और बात पर ध्यान दिया होगा 90 % ऐलोपैथी औषधियों पर कोई हरा या लाल निशान नहीं होता । कारण एक ही है इन ओषधियों मे बहुत अधिक मांसाहार का उपयोग होता है ,और कुछ दिन पहले कोर्ट ने कहा था की ओषधियों पर हरा या लाल निशान अनिवार्य होना चाहिए और ये सारी बड़ी एलोपेथी कंपनियाँ अपनी छाती कूटने लग गई थी ।

कैप्सूल के अतिरिक्त मित्रों एलोपैथी मे गोलियाँ होती है ( tablets ) । तो कुछ गोलियाँ जो होती है जिनको आप अपने हाथ पर रगड़ेगे तो उसमे से पाउडर निकलेगा ,हाथ सफ़ेद हो जाएगा, पीला हो जाएगा ,वो तो ठीक है लेकिन कुछ गोलियां ऐसी होती है । जिनको हाथ पर घसीटने से कुछ नहीं होता उन सबके ऊपर भी जिलेटिन का कोटिंग किया होता है वो भी कैप्सूल जैसा है । वो भी सब मांसाहारी है ।


थोड़ी सी कुछ गोलियां ऐसी है जिन पर जिलेटिन का कोटिंग नहीं होता ,लेकिन वो गोलियां इतनी खतरनाक है कि आपको कैंसर ,शुगर ,जैसे 100 रोग कर सकती हैं । जैसे एक दवा है पैरासिटामोल । इस पर जिलेटिन का कोटिंग नहीं है ,
लेकिन ज्यादा प्रयोग किया तो ब्रेन हैमरेज हो जाएगा । ऐसे ही एक सिरदर्द की दवा है, उस पर भी जिलेटिन का कोटिंग नहीं ज्यादा प्रयोग किया तो लीवर खराब हो जाएगा , ऐसे ही हार्ट के रोगियों को एक दवा दी जाती है उसमे भी कोटिंग नहीं लेकिन उसको ज्यादा खाओ तो किडनी खराब हो जाएगी ।


तो मित्रो !!! जिनके ऊपर कोटिंग नहीं है वो वो दवा जहर है और जिनके ऊपर कोटिंग है वो दवा मांसाहारी है , तो अब प्रश्न उठता है तो हम खाएं क्या ?

मित्रो रास्ता एक ही आप अपनी चिकित्सा स्वयं करों अर्थात् आपको पुनः  आयुर्वेद की ओर लौटना पड़ेगा । ठण्डा पानी पीना बन्द करें, गरम पानी पीएँ । इस क्रिया से सौ से अधिक रोग ठीक हो जाएँगे । फ्रिज का प्रयोग बन्द करें । देशी खाना खाएँ । खाना खाने से एक घण्टा पूर्व पानी पीएँ और खाना खाने के बाद डेढ घण्टे बाद पानी पीएँ ।

एक काम आप और कर सकते हैं कि कोई भी विदेशी खाद्य पदार्थ और विदेशी उत्पाद स्किन से सम्बन्धित का प्रयोग सर्वथा बन्द कर दें । तभी आप सुरक्षित रह पाएँगे ।


मित्रो !!! दरअसल हमारे देश गौ ह्त्या मात्र मांस के लिए नहीं की जाती है इसके अतिरिक्त जो खून निकलता है,जो हड्डियों का चुरा होता है ,जो चर्बी से तेल निकलता है ,बड़ी आंत से जिलेटिन निकलती है ,चमड़ा निकलता है इन सब का प्रयोग कॉसमेटिक (सौन्दर्य उत्पाद ),टूथपेस्ट ,नेलपॉलिश ,लिपस्टिक खाने पीने की चींजे , एलोपेथी ,दवाइयाँ जूते ,बैग आदि बनाने मे प्रयोग किया जाता है , जिसे हम सब लोग अपने दैनिक जीवन मे बहुत बार प्रयोग मे लाते है ।


तो गौ रक्षा की बात करने से पूर्व पहले हम सबको उन सब वस्तुओ का त्याग करना चाहिए जिनकी कारण जीव ह्त्या होती है , दैनिक जीवन मे प्रयोग होने वाली वस्तुओ की पहले अच्छे से परख करनी चाहिए फिर प्रयोग मे लाना चाहिए ।


इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचाने मे
सहयोग दें share जरूर करें
इस link पर देखें कैसे जिलेटिन (गौ ह्त्या करके )
कैप्सूल बनाये जाते हैं


============================
www.facebook.com/jaivharatmahan

==========================
www.facebook.com/kathamanzari
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(1.) वैदिक संस्कृत
www.facebook.com/vaidiksanskrit
www.facebook.com/vedisanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
www.facebook.com/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
www.facebook.com/jnanodaya
(4.) शिशु-संस्कृतम्
www.facebook.com/shishusanskritam
(5.) मन की बात
www.facebook.com/gyankisima
(6.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(7.) गीर्वाणवाणी
www.facebook.com/girvanvani
(8.) भारत महान्
www.facebook.com/jaibharatmahan
(9.) कथा-मञ्जरी
www.facebook.com/kathamanzari
(10.) काव्याञ्जलिः
www.facebook.com/kavyanzali
हमारे समूहः---
(1.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(4.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(5.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(6.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(7.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(8.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(9.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(10.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(11.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(12.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(13) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(14.) आर्य समाज पंजाब
https://www.facebook.com/groups/aryasamaja
(15.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik

फेसबुक का निर्माता भारतीय

!!!---: फेसबुक का निर्माता भारतीय:---!!!
========================
www.vaidiksanskrit.com

सोशल वेबवाइट FB यानी चलाने वालों मे एक फीसदी लोगों को भी यह पता नहीं होगा कि इसके संस्थापक मार्क जुकरबर्ग नहीं, बल्कि अप्रवासी भारतीय दिव्य नरेंद्र है। दिव्य नरेंद्र हिंदुस्तानियों के लिए ज्यादा जाना-पहचाना नाम नहीं है।


महज 29 साल के दिव्य नरेंद्र अमरीका में रहने वाले अप्रावासी भारतीय हैं। उनके माता-पिता काफी समय पहले से अमरीका में ही आ बसे हैं। दिव्य का जन्म 18 मार्च 1982 को न्यूयार्क में हुआ था। जाहिर है कि दिव्य के पास भी अमरीकी नागरिकता है। पेशे से उनके माता-पिता डॉक्टर हैं। परंपरावादी। अंतर्मुखी। दूसरे भारतीय माता-पिता की तरह वे भी दिव्य को डॉक्टर बनाना चाहते थे, पर दिव्य को यह मंजूर नहीं था। उनके अंदर एक एंटरप्रिन्योर बनने का सपना था। तमाम संघर्षों से जूझते हुए वह ऐसा करने में सफल भी हुए और 2008 के अमेरिकी कोर्ट के फैसले के बाद यह बात पक्की भी हो गई कि दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक का आइडिया दिव्य नरेंद्र का था।


दरअसल फेसबुक का जन्म हॉर्वर्ड कनेक्शन सोशल साइट की निर्माण प्रक्रिया के दौरान हुआ। दिव्य हॉर्वर्ड कनेक्शन प्रॉजेक्ट पर काफी आगे बढ़ चुके थे। उसके लंबे समय बाद जुकरबर्ग मौखिक समझौते के तहत उसमें शामिल हुए। पूरी चालाकी से उन्होंने इस प्रॉजेक्ट को हाईजैक कर लिया और बाद में बाकायदा फेसबुक नाम से डोमेन रजिस्टर्ड कर उस प्रॉजेक्ट को अमली जामा पहना दिया। इस बीच दिव्य और उनके सहयोगियों की जुकरबर्ग से तीखी नोकझोंक हुई। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने मामले में हस्तक्षेप किया और दिव्य को कोर्ट जाने की सलाह दी। आपको बता दें कि 99 प्रतिशत अमेरीकी लोग चोर होते हैं और हमारी विद्याओं पर कब्जा कर लेते हैं या लोभ देकर पैसे से खरीद लेते हैं, बाद अपना नाम भी करते हैं और पैसा भी खूब कमाते हैं । अभी कु वर्ष पूर्व अमेरीकियों ने हल्दी पर पेटेंट करवाया था । श्री राजीव दीक्षित कुछ अन्य भारतीयों ने अमेरीकी न्यायालय में केस उस पेटेंट को भारतीय करवाया ।


दिव्य ने जुकरबर्ग के खिलाफ 2004 में अमेरिका की एक अदालत में मुकदमा कर दिया। फैसला दिव्य और उनके दोस्तों के पक्ष में आया। जुकरबर्ग को हर्जाने के तौर पर 650 लाख डॉलर चुकाने पड़े, लेकिन दिव्य इससे संतुष्ट नहीं हुए। उनका तर्क था कि उस समय फेसबुक के शेयरों की जो बाजार में कीमत थी, उन्हें उसके हिसाब से हर्जाना नहीं दिया गया।


उनका कहना था कि हर्जाने की राशि फेसबुक की मौजूदा बाजार कीमत के आधार पर तय की जानी चाहिए। हाल ही में गोल्डमैन स्नैच ने फेसबुक की बाजार कीमत 50 बिलियन डॉलर आँकी थी। उन्होंने एक बार फिर 2008 में मुकदमा दायर किया, लेकिन अमरीकी कोर्ट ने पिछले फैसले को ही बरकरार रखा। अमरीकी कोर्ट के फैसले के आईने में देखा जाए तो जो प्रसिद्धि आज मार्क जुकरबर्ग को मिली है, उसके सही हकदार facebook के असली निर्माता दिव्य नरेंद्र थे। वहाँ की अदालतें भी अमेरीकियों के समर्थन में फैसले देती हैं ।


तो अंत जो लोग हमारे असली भारतीय इतिहास को जानते है वो बहुत आसानी से समझ जाएंगे कि भारतीयों द्वारा किए गए आविष्कारों को चोरी कर अपने नाम से दुनिया मे फैलाना अंग्रेज़ो, अमरीकियों, यूरोपीयों की पुरानी आदत है ! वो चाहे बेशक गुरुत्वकर्षण सिद्धांत के नियम हो (भारतीय आचार्य भास्कराचार्य ने खोज की थी) ,मर्करी बनाना हो ,कागज बनाना हो ,पलास्टिक सर्जरी करना हो (यह शुद्ध भारतीय आविष्कार है, इसे अंग्रेज भी मानते हैं ।) या बापू तलपडे द्वारा हवाई जहाज उड़ाना हो (इस पर राबर्ट बन्धुओं ने कब्जा कर लिया) या जगदीश चंद्र बसु द्वारा टेलीफोन का निर्माण करना हो ! और ऐसे सैंकड़ों आविष्कार हो ! या अंत मे भाई दिव्य नरेंद्र द्वारा facebook का निर्माण करना हो ! सब अंग्रेज़ो ने भारतीयो से चोरी कर अपने नाम से चिपकाया हुआ है !


इस जानकरी को हर भारतीय तक पहुंचाये !
भारतीय होने पर गर्व करे !
अधिक से अधिक share करें !!
========================

==========================
www.facebook.com/kathamanzari
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(1.) वैदिक संस्कृत
www.facebook.com/vaidiksanskrit
www.facebook.com/vedisanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
www.facebook.com/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
www.facebook.com/jnanodaya
(4.) शिशु-संस्कृतम्
www.facebook.com/shishusanskritam
(5.) मन की बात
www.facebook.com/gyankisima
(6.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(7.) गीर्वाणवाणी
www.facebook.com/girvanvani
(8.) भारत महान्
www.facebook.com/jaibharatmahan
(9.) कथा-मञ्जरी
www.facebook.com/kathamanzari
(10.) काव्याञ्जलिः
www.facebook.com/kavyanzali
हमारे समूहः---
(1.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(4.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(5.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(6.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(7.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(8.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(9.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(10.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(11.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(12.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(13) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(14.) आर्य समाज पंजाब
https://www.facebook.com/groups/aryasamaja
(15.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik

क्या फायदे है अपने डाक्यूमेंट्स के लिए सरकारी डिजिटल लॉकर के

क्या फायदे है अपने डाक्यूमेंट्स के लिए सरकारी डिजिटल लॉकर के
====================================
www.vaidiksanskrit.com
भारत सरकार द्वारा "डिजिटल भारत" की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में मुफ्त "डिजिटल लोकर" सेवा का प्रारंभ किया गया है| यह देश में ई-सेवाओं के विस्तार और लोगों के लिए सरकारी सेवाओं को आसान बनाने की दिशा बहुत उपयोगी सिद्ध होगा |
क्या है डिजिटल लाकर :---
====================
यह एक ऐसा स्थान है, जहाँ हम अपने किसी भी डॉक्यूमेंट जैसे पहचान पत्र, पेन कार्ड, डिग्री, इत्यादि को अपलोड करके सुरक्षित रख सकते है | इसके अलावा यदि कोई सरकारी विभाग हमें कोई डॉक्यूमेंट (जैसे ड्राइविंग लाइसेंस) जारी करता है तो वह भी यहाँ सुरक्षित रूप से उपलब्ध रहेगा |
क्या क्या है इस डिजिटल लॉकर के उपयोग :---
=================================
इस डिजिटल लॉकर के निम्न उपयोग/फायदे है:
किसी भी संस्थान या सरकारी विभाग में विभ्भिन कार्यों के लिए अपने डॉक्यूमेंट की भौतिक कॉपी देने की आवश्यकता से निजात |
अपने ओरिजिनल डॉक्यूमेंट को जाँच के लिए देने का झंझट समाप्त |
डॉक्यूमेंट की फोटो कॉपी लेने और उसे विभ्भिन विभागों और संस्थाओं को भेजने से छुटकारा |
किसी भी सरकारी विभाग द्वारा जारी दस्तावेज जैसे पेन कार्ड, वोटर कार्ड तक इन्टरनेट पर कहीं भी से पहुँच |
सरकारी विभागों को भौतिक दस्तावेजों के सँभालने और सत्यापित करने के झंझट से मुक्ति और इससे सरकारी कार्यों में तेजी |
डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा |
किसी भी कंपनी या संस्थान द्वारा डॉक्यूमेंट मांगे जाने पर, भौतिक डॉक्यूमेंट की जगह इस डिजिटल लॉकर में रखे डॉक्यूमेंट का लिंक उनको ईमेल पर शेयर करना |
किसी भी डॉक्यूमेंट की स्कैन कॉपी को इस लॉकर में अपलोड करके सहेजना |
अपने डॉक्यूमेंट, उनको जारी करने वाले विभाग की जानकारी, उनको उपयोग करने वालों की जानकारी इत्यादि आसानी से जान सकते है |
डीजीलोकर के बारे में और सामान्य जानकारी :----
======================
https://digitallocker.gov.in/…/Hindi_FAQ-Digital_Locker_v0_…
कैसे उठायें इस सेवा का लाभ :----
======================
इस डिजिटल लॉकर का लाभ उठाने के लिए निम्न आवश्यकताएं है :---
आधार कार्ड नंबर
आधार कार्ड से जुड़ा मोबाइल नंबर
यदि आपके पास यह दोनों मौजूद है, तो आप इस वेबसाइट पर इस सेवा के लिए रजिस्टर कर सकते है :---
इस सेवा से जुड़े किसी भी प्रकार के सवाल या समस्या में समाधान के लिए निम्न पते पर ईमेल करें :----
support@digitallocker.gov.in
=======================
www.facebook.com/jnanodaya

दूरदर्शन ला रहा नई तकनीक .. 600 चैनल्स देखिए फ्री

!!!---: दूरदर्शन ला रहा नई तकनीक .. 600 चैनल्स देखिए फ्री :---!!!
============================================
(TV,मोबाइल,लैपटॉप,टैबलेट)
www.vaidiksanskrit.com
--------
जल्द ही आप 600 से भी ज्यादा चैनल दूरदर्शन के चैनलों की तरह फ्री में देख सकेंगे। ...इसमे सेट टॉप बॉक्स की ज़रूरत नहीं होगी। दूरदर्शन बहुत ही लेटेस्ट टेक्नोलॉजी DVB-T का उपयोग शुरू करने जा रहा है। DVB-T (Digital Video Broadcast-Terrestrial) टेक्नोलॉजी के अंतर्गत दूरदर्शन अपने ट्रांसमीटरों को डिजिटल बनाने जा रहा है।
www.facebook.com/vaidiksanskrit
.
इसके लिए देशभर में ट्रांसमीटर लगाए जाएंगे और दूरदर्शन की यह सौगात दर्शकों के लिए जल्द ही शुरू हो जाएगी। इस नइ टेक्नोलॉजी से पेड चैनल भी देखें जा सकेंगे और इनके लिए भी हर महीने कोइ शुल्क नहीं लिया जाएगा। देश में इस समय चैनल दिखाने की दो व्यवस्थाएं है पहला-सैटेलाइट के द्वारा, इससे फिलहाल सारे चैनल दिखाएं जाते हैं और दूसरा- ट्रांसमीटरों के द्वारा, ट्रांसमीटरों के द्वारा प्रसारण का अधिकार केवल दूरदर्शन को ही है।
.
अब इस नइ सेवा से दूरदर्शन की क्षमता अपने दर्शकों को एक चैनल की जगह दस चैनल दिखाने की हो जाएगी।
.
www.facebook.com/shishusanskritam
---------
क्या है खास-
.
1.दूरदर्शन की इस नइ टेक्नोलॉजी से आप मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट आदि सभी पर आप फ्री में चैनलों को लुत्फ उठा सकेंगे।
2.DVB-T बहुत आधुनिक टेक्नोलॉजी है इससे दूरदर्शन की क्षमता कइ गुना बढ़ जायगी और ज्यादा से ज्यादा फ्री चैनल दर्शकों को दिखाएं जा सकेंगे।
3.अन्य प्राइवेट कंपनियां देशभर में अपने चैनल सैटेलाइट के द्वारा दिखाती है, लेकिन दूरदर्शन को इस नई सेवा के लिए यह कंपनियां थोडा सा शुल्क देकर अपनी पसंद के इलाकों में प्रसारण कर सकती है।
4.सेटेलाइट की तुलना में दूरदर्शन से चैनल दिखाना अपेक्षाकृत 25% तक तक सस्ता पड़ेगा।
5.दूरदर्शन द्वारा प्रसारित सभी चैनल आप DVB-T सुविधा से लैस टीवी में नॉर्मल एंटीना लगाकर देख सकेंगे
6.पुराने टीवी में यह चैनल देखने के लिए आपको बस डोंगल की जरूरत पड़ेगी और सेटटॉप बॉक्स को लगाना नहीं पड़ेगा।
=========================
www.facebook.com/jaibharatmahan

==========================
www.facebook.com/kathamanzari
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(1.) वैदिक संस्कृत
www.facebook.com/vaidiksanskrit
www.facebook.com/vedisanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
www.facebook.com/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
www.facebook.com/jnanodaya
(4.) शिशु-संस्कृतम्
www.facebook.com/shishusanskritam
(5.) मन की बात
www.facebook.com/gyankisima
(6.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(7.) गीर्वाणवाणी
www.facebook.com/girvanvani
(8.) भारत महान्
www.facebook.com/jaibharatmahan
(9.) कथा-मञ्जरी
www.facebook.com/kathamanzari
(10.) काव्याञ्जलिः
www.facebook.com/kavyanzali
हमारे समूहः---
(1.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(4.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(5.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(6.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(7.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(8.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(9.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(10.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(11.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(12.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(13) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(14.) आर्य समाज पंजाब
https://www.facebook.com/groups/aryasamaja
(15.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik

रविवार, 14 फ़रवरी 2016

वैलेंटाइन की असलियत

वैलेंटाइन की असलियत सुनिएः---
https://www.youtube.com/watch?v=V1nW7hUGJws
=========================================
www.vaidiksanskrit.com
++++++++++++++++++++++++

मित्रो !!! पूरा यूरोप और अमेरिका रखैलों का समाज है । आपको विश्वास नहीं होगा । इस पोस्ट पढें या ऊपर दिए वीडियों में श्री राजीव दीक्षित जी का खोजपूर्ण वक्तव्य सुनें ।


यूरोप के लोग विवाह नहीं करते हैं, बल्कि पशुओं की तरह रहते हैं । स्त्री को वस्तु मानते हैं, जिसमें आत्मा नाम की कोई चीज नहीं होती है , एक से सन्तुष्ट हो जाओ या मन भर जाए या अनुपयोगी हो जाए या वृद्धा हो जाए तो उसे वस्तु की तरह फेंक दो और बाजार से दूसरी औरत ले आओ, क्योंकि उनके बाजार औरते पैसे पर मिलती है । उसके साथ कुछ दिन रहो, फिर बदल लो ।

अमेरिकी और यूरोपीय समाज में भाई-बहन का रिश्ता नहीं होता, जब जिसके साथ चाहो, सेक्स करो । वहाँ के 80 प्रतिशत बच्चों को अपने बाप पता नहीं रहता, क्योंकि एक औरत कई पुरुषों से सेक्स करती है, पता नहीं किसके वीर्य से कौन-सा बच्चा पैदा हुआ ।

( www.facebook.com/vaidiksanskrit )

आजकल आपने एक नया शब्द सुना होगा, जो उन्हीं की देन हैः---
"Live in Relationship" ये शब्द आज कल हमारे देश में भी नव-अभिजात्य वर्ग में चल रहा है, इसका मतलब होता है कि "बिना शादी के पती-पत्नी की तरह से रहना" । तो उनके यहाँ, मतलब यूरोप और अमेरिका में ये परंपरा आज भी चलती है ।

खुद प्लेटो (एक यूरोपीय दार्शनिक) का एक स्त्री से सम्बन्ध नहीं रहा, प्लेटो
ने लिखा है कि "मेरा 20-22 स्त्रियों से सम्बन्ध रहा है" अरस्तु भी यही कहता
है, देकातेर् भी यही कहता है, और रूसो ने तो अपनी आत्मकथा में लिखा है कि "एक स्त्री के साथ रहना, ये तो कभी संभव ही नहीं हो सकता, It's Highly Impossible" |

तो वहाँ एक पत्नी जैसा कुछ होता नहीं और इन सभी तुच्छ दार्शनिकों का तो
कहना है कि "स्त्री में तो आत्मा ही नहीं होती" "स्त्री तो मेज और कुर्सी के
समान हैं, जब पुराने से मन भर गया तो पुराना हटा के नया ले आये " तो बीच-बीच में यूरोप में कुछ-कुछ ऐसे लोग निकले जिन्होंने इन बातों का विरोध किया और इन रहन-सहन की व्यवस्थाओं पर कड़ी टिप्पणी की | उन कुछ लोगों में से एक ऐसे ही यूरोपियन व्यक्ति था जो आज से लगभग 1500 साल पहले पैदा हुए, उनका नाम था - वैलेंटाइन | और ये कहानी है 478 AD (after death) की, यानि ईसा मसीह की मृत्यु के बाद |

( www.facebook.com/girvanvani )

उस वैलेंटाइन नाम के महापुरुष का कहना था कि "हम लोग (यूरोप के लोग) जो
शारीरिक सम्बन्ध रखते हैं कुत्तों की तरह से, जानवरों की तरह से, ये अच्छा
नहीं है, इससे सेक्स-जनित रोग (veneral disease) होते हैं, इनको सुधारो, एक
पति-एक पत्नी के साथ रहो, विवाह कर के रहो, शारीरिक संबंधो को उसके बाद ही शुरू करो" ऐसी-ऐसी बातें वो करते थे और वो वैलेंटाइन महाशय उन सभी लोगों को ये सब सिखाते थे, बताते थे, जो उनके पास आते थे, रोज उनका भाषण यही चलता था रोम में घूम-घूम कर |

संयोग से वो चर्च के पादरी हो गए तो चर्च में आने वाले हर व्यक्ति को यही
बताते थे, तो लोग उनसे पूछते थे कि ये वायरस आप में कहाँ से घुस गया, ये तो
हमारे यूरोप में कहीं नहीं है, तो वो कहते थे कि "आजकल मैं भारतीय सभ्यता और दर्शन का अध्ययन कर रहा हूँ, और मुझे लगता है कि वो परफेक्ट है, और इसिलए मैं चाहता हूँ कि आप लोग इसे मानो", तो कुछ लोग उनकी बात को मानते थे, तो जो लोग उनकी बात को मानते थे, उनकी शादियाँ वो चर्च में कराते थे और एक-दो नहीं उन्होंने सैकड़ों शादियाँ करवाई थी |

( www.facebook.com/laukiksanskrit )

जिस समय वैलेंटाइन हुए, उस समय रोम का राजा था क्लौड़ीयस । क्लौड़ीयस ने कहा कि "ये जो आदमी है-वैलेंटाइन, ये हमारे यूरोप की परंपरा को बिगाड़ रहा है, हम बिना शादी के रहने वाले लोग हैं, मौज-मजे में डूबे रहने वाले लोग हैं, और ये शादियाँ करवाता फ़िर रहा है, ये तो अपसंस्कृति फैला रहा है, हमारी संस्कृति
को नष्ट कर रहा है", तो क्लौड़ीयस ने आदेश दिया कि "जाओ वैलेंटाइन को पकड़ के लाओ ", तो उसके सैनिक वैलेंटाइन को पकड़ के ले आये |

क्लौड़ीयस ने वैलेंटाइन से कहा कि "ये तुम क्या गलत काम कर रहे हो ? तुम अधर्म फैला रहे हो, अपसंस्कृति ला रहे हो" तो वैलेंटाइन ने कहा कि "मुझे लगता है कि ये ठीक है" , क्लौड़ीयस ने उसकी एक बात न सुनी और उसने वैलेंटाइन को फाँसी की सजा दे दी, आरोप क्या था कि वो बच्चों की शादियाँ कराते थे, मतलब शादी करना जुर्म था | क्लौड़ीयस ने उन सभी बच्चों को बुलाया, जिनकी शादी वैलेंटाइन ने करवाई थी और उन सभी के सामने वैलेंटाइन को 14 फ़रवरी 498 ईःवी को फाँसी दे दिया गया |

( www.facebook.com/shishusanskritam )

पता नहीं आप में से कितने लोगों को मालूम है कि पूरे यूरोप में 1950 ईःवी तक
खुले मैदान में, सावर्जानिक तौर पर फाँसी देने की परंपरा थी | तो जिन बच्चों
ने वैलेंटाइन के कहने पर शादी की थी वो बहुत दुखी हुए और उन सब ने उस
वैलेंटाइन की दुखद याद में 14 फ़रवरी को वैलेंटाइन डे मनाना शुरू किया तो उस
दिन से यूरोप में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है | मतलब ये हुआ कि वैलेंटाइन, जो कि यूरोप में शादियाँ करवाते फ़िरते थे, चूकी राजा ने उनको फाँसी की सजा दे दी, तो उनकी याद में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है | ये था वैलेंटाइन डे का इतिहास और इसके पीछे का आधार |

अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात है यहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अद्भुत या अचरज लगे लेकिन यूरोप में शादी होना ही सबसे असामान्य बात है | अब ये वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में कॉलजों में आ गया है और बड़े धूम-धाम से मनाया जा रहा है और हमारे यहाँ के
लड़के-लड़िकयाँ बिना सोचे-समझे एक दुसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं
|

जो कार्ड होता है उसमे लिखा होता है " Would You Be My Valentine" जिसका मतलब होता है "क्या आप मुझसे शादी करेंगे" | मतलब तो किसी को मालूम होता नहीं है, वो समझते हैं कि जिससे हम प्यार करते हैं उन्हें ये कार्ड देना चाहिए तो वो इसी कार्ड को अपने मम्मी-पापा को भी दे देते हैं, दादा-दादी को भी दे देते हैं और एक दो नहीं दस-बीस लोगों को ये ही कार्ड वो दे देते हैं |

( www.facebook.com/jnanodaya )


और इस धंधे में बड़ी-बड़ी कंपिनयाँ लग गयी हैं जिनको कार्ड बेचना है, जिनको
गिफ्ट बेचना है, जिनको चाकलेट बेचनी हैं और टेलीविजन चैनल वालों ने इसका
धुआँधार प्रचार कर दिया | ये सब लिखने के पीछे का उद्देश्य यही है कि नक़ल आप करें तो उसमे अकल भी लगा लिया करें | उनके यहाँ साधारणतया शादियाँ नहीं होती है और जो शादी करते हैं वो वैलेंटाइन डे मनाते हैं लेकिन हम भारत में क्यों ??????

www.facebook.com/chaanakyaneeti

वैलेंटाइन-डे प्रेम दिवस नही विनाश दिवस है युवावर्ग के लिए...!!!
===========================================
www.facebook.com/satyasanatanvaidik

(1.) आज समाज में प्रेम-दिवस (वेलेन्टाइन डे) के नाम पर जो विनाशकारी काम विकार का विकास हो रहा है, वो आगे चलकर चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, खोखलापन, बुढ़ापा और जल्द मौत लाने वाला साबित होगा।

(2.) इन्नोसन्टी रिपोर्ट कार्ड' के अनुसार 28 विकसित देशों में हर साल 13 से 19 वर्ष की 12 लाख 50 हजार किशोरियाँ गर्भवती हो जाती हैं। उनमें से 5 लाख गर्भपात कराती हैं और 7 लाख 50 हजार कुँवारी माता बन जाती हैं।

(3.) अमेरिका में हर साल 4 लाख 94 हजार अनाथ बच्चे जन्म लेते हैं और 30 लाख किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों के शिकार होते हैं। यौन संबन्ध करने वालों में 25% किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों से पीड़ित हैं।

(4.) असुरक्षित यौन संबंध करने वालों में 50% को गोनोरिया, 33% को जैनिटल हर्पिस और एक प्रतिशत के एड्स का रोग होने की संभावना है। एडस के नये रोगियों में 25% 22 वर्ष से छोटी उम्र के होते हैं।

(5.) विदेशों में गर्भपात करानेवाली किशोरियां- 5,00,000 कुँवारी माता बनकर नर्सिंग होम, सरकार व माँ-बाप पर बोझा बनने वाले अथवा वैश्यावृत्ति धारण करने वाली किशोरियाँ 7 लाख कुछ हज़ार है।

(6.) थाईलैंड की रिपोर्ट अनुसार 15 से 19 साल की लड़कियाँ 1हज़ार में से 50 लड़कियाँ माँ बन जाती हैं।

और 10 से 19 साल के युवाओं में यौन संबंधी रोग पांच गुना तक बढ़ गए हैं। थाईलैंड में क़रीब चार लाख 50 हज़ार लोगो को HIV रोग से पीड़ित है।

(7.) आज अमेरिका के 33% स्कूलों में यौन शिक्षा के अंतर्गत 'केवल संयम' की शिक्षा दी जाती है। इसके लिए अमेरिका ने 40 करोड़ से अधिक डॉलर (20 अरब रूपये) खर्च किये हैं।

(8.) भारतवासियों प्रेम दिवस जरूर मनायें, लेकिन प्रेमदिवस में संयम और सच्चा विकास लाना चाहिए। युवक युवती मिलेंगे तो प्रेम दिवस नही विनाश-दिवस बनेगा।

www.facebook.com/jaibharatmahan
===========================
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(1.) वैदिक संस्कृत
www.facebook.com/vaidiksanskrit
www.facebook.com/vedisanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
www.facebook.com/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
www.facebook.com/jnanodaya
(4.) शिशु-संस्कृतम्
www.facebook.com/shishusanskritam
(5.) मन की बात
www.facebook.com/gyankisima
(6.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(7.) गीर्वाणवाणी
www.facebook.com/girvanvani
(8.) भारत महान्
www.facebook.com/jaibharatmahan
(9.) कथा-मञ्जरी
www.facebook.com/kathamanzari
(10.) काव्याञ्जलिः
www.facebook.com/kavyanzali
हमारे समूहः---
(1.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(4.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(5.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(6.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(7.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(8.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(9.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(10.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(11.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(12.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(13) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(14.) आर्य समाज पंजाब
https://www.facebook.com/groups/aryasamaja
(15.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik