!!!---: वैदिक सभ्यता, सिन्धु सभ्यता आर्य सभ्यता :---!!!
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पूरे संसार में ऐसी कोई सभ्यता नहीं, जैसी आर्यों की सभ्यता थी । आइए जानें आर्यों की विशाल सभ्यता.......
सिन्धु घाटी की सभ्यता प्रमुख रूप से नगर सभ्यता थी । एक निश्चित योजना के अनुसार नगर बनवाए गए थे । भवनों का निर्माण ४०x 20x 10 और ३०x १५x ७.५ सेंटीमीटर आकार वाली पकाई हुई ईंटों से किया गया था ।
सडकें ९ फीट से ३४ फीट तक चौडी थीं, जो परस्पर समकोण पर काटती थीं । गन्दे पानी की निकासी के लिए पक्की ईंटों से बनी नालियों की यथोचित व्यवस्था थी । प्रायः सभी घरों में आँगन और स्नानागार होता था । आँगन के ही एक ओर पाकशाला (रसोईघर) की व्यवस्था थी, भवन द्वार मुख्य सडक पर न होकर पीछे की ओर गली में हुआ करते थे ।
मोहनजोदडों से प्राप्त भग्नावशेषों में एक विशाल स्नानागार उल्लेखनीय है । ईंटों के स्थापत्य का यह सुन्दर उदाहरण है । यह ११.८८ मीटर लम्बा, ७.०१ मीटर चौडा और २.४३ मीटर गहरा है । स्नानकुण्ड के दोनों सिरों पर प्रवेश के लिए तल तक सीढियाँ हैं । पास ही कुण्ड में जल भरने के लिए कुआँ है । जल निकासी के लिए नाली भी है ।
इस सभ्यता के अन्तर्गत पंजाब, सिन्ध और बलुचिस्तान के भाग ही नहीं, बल्कि गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सीमान्त भाग भी थे । इसका फैलाव उत्तर में जम्मू से लेकर दक्षिण में नर्मदा के मुहाने तक और पश्चिम में मकरान समुद्र तट से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ तक था ।
अब तक भारत वर्ष नामक इस उपमहाद्वीप में इस सभ्यता के लगभग १,००० स्थानों का पता लग चुका है ।
हडप्पा और मोहनजोदडों के अलावा तीसरा नगर सिन्ध में ही मोहनजोदडों से १३० किलोमीटर दक्षिण में "चन्हुदडो" स्थल पर था । चौथा नगर गुजरात में खंभात की खाडी के ऊपर भोगवर नदी के किनारे स्थित "लोथल" है । पाँचवाँ नगर राजस्थान के घाघरा नदी (प्राचीन नाम सरस्वती) के किनारे "कालीबंगा" में स्थित था । छठा नगर हरियाणा के हिसार जिले में स्थित "बणावली" था । इन छहों स्थान पर परिपक्व और उन्नत सिन्धु घाटी सभ्यता के दर्शन होते हैं । बलूचिस्तान में "सुतकोगेंडोर" और महाराष्ट्र में भी "सुरकोतडा" में यह सभ्यता परिपक्व अवस्था में देखी गई है ।
गुजरात के काठियावाड प्रायद्वीप में "रंगपुर" और "रोजडी" हैं । अन्य प्रमुख सिन्धु घाटी के सभ्यता स्थलों में रोपड (पंजाब), आलमगीर (पश्चिम उत्तर प्रदेश) , अली मुराद और कोट दीजी (सिन्ध पाकिस्तान) प्रमुख हैं ।
हडप्रा सभ्यता से पूर्व भी यह देश सभ्य था और इसकी एक विकसित सभ्यता थी । यह सभ्यता आर्यों की सभ्यता थी । ये आर्य वेद के अनुयायी थे ।
जो लोग ( अंग्रेज और पाश्चात्य विचारधारा वाले काले भारतीय अंग्रेज) हडप्पा सभ्यता को मिश्र, स्याम देश, असीरिया, वैविलोन आदि देशों की सभ्यता से उधार ली हुई सभ्यता मानते हैं , उनकी जडें हिल गई हैं ।
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पूरे संसार में ऐसी कोई सभ्यता नहीं, जैसी आर्यों की सभ्यता थी । आइए जानें आर्यों की विशाल सभ्यता.......
सिन्धु घाटी की सभ्यता प्रमुख रूप से नगर सभ्यता थी । एक निश्चित योजना के अनुसार नगर बनवाए गए थे । भवनों का निर्माण ४०x 20x 10 और ३०x १५x ७.५ सेंटीमीटर आकार वाली पकाई हुई ईंटों से किया गया था ।
सडकें ९ फीट से ३४ फीट तक चौडी थीं, जो परस्पर समकोण पर काटती थीं । गन्दे पानी की निकासी के लिए पक्की ईंटों से बनी नालियों की यथोचित व्यवस्था थी । प्रायः सभी घरों में आँगन और स्नानागार होता था । आँगन के ही एक ओर पाकशाला (रसोईघर) की व्यवस्था थी, भवन द्वार मुख्य सडक पर न होकर पीछे की ओर गली में हुआ करते थे ।
मोहनजोदडों से प्राप्त भग्नावशेषों में एक विशाल स्नानागार उल्लेखनीय है । ईंटों के स्थापत्य का यह सुन्दर उदाहरण है । यह ११.८८ मीटर लम्बा, ७.०१ मीटर चौडा और २.४३ मीटर गहरा है । स्नानकुण्ड के दोनों सिरों पर प्रवेश के लिए तल तक सीढियाँ हैं । पास ही कुण्ड में जल भरने के लिए कुआँ है । जल निकासी के लिए नाली भी है ।
इस सभ्यता के अन्तर्गत पंजाब, सिन्ध और बलुचिस्तान के भाग ही नहीं, बल्कि गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सीमान्त भाग भी थे । इसका फैलाव उत्तर में जम्मू से लेकर दक्षिण में नर्मदा के मुहाने तक और पश्चिम में मकरान समुद्र तट से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ तक था ।
अब तक भारत वर्ष नामक इस उपमहाद्वीप में इस सभ्यता के लगभग १,००० स्थानों का पता लग चुका है ।
हडप्पा और मोहनजोदडों के अलावा तीसरा नगर सिन्ध में ही मोहनजोदडों से १३० किलोमीटर दक्षिण में "चन्हुदडो" स्थल पर था । चौथा नगर गुजरात में खंभात की खाडी के ऊपर भोगवर नदी के किनारे स्थित "लोथल" है । पाँचवाँ नगर राजस्थान के घाघरा नदी (प्राचीन नाम सरस्वती) के किनारे "कालीबंगा" में स्थित था । छठा नगर हरियाणा के हिसार जिले में स्थित "बणावली" था । इन छहों स्थान पर परिपक्व और उन्नत सिन्धु घाटी सभ्यता के दर्शन होते हैं । बलूचिस्तान में "सुतकोगेंडोर" और महाराष्ट्र में भी "सुरकोतडा" में यह सभ्यता परिपक्व अवस्था में देखी गई है ।
गुजरात के काठियावाड प्रायद्वीप में "रंगपुर" और "रोजडी" हैं । अन्य प्रमुख सिन्धु घाटी के सभ्यता स्थलों में रोपड (पंजाब), आलमगीर (पश्चिम उत्तर प्रदेश) , अली मुराद और कोट दीजी (सिन्ध पाकिस्तान) प्रमुख हैं ।
हडप्रा सभ्यता से पूर्व भी यह देश सभ्य था और इसकी एक विकसित सभ्यता थी । यह सभ्यता आर्यों की सभ्यता थी । ये आर्य वेद के अनुयायी थे ।
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