www.vaidiksanskrit.com

बुधवार, 26 अक्टूबर 2016

भारतीय विज्ञान

भारतीय विज्ञान
===================

भारतीय विज्ञान की परंपरा विश्व की प्राचीनतम वैज्ञानिक परंपराओं में एक है। भारत में विज्ञान का उद्भव ईसा से 3000 वर्ष पूर्व हुआ है। हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो की खुदाई से प्राप्त सिंध घाटी के प्रमाणों से वहाँ के लोगों की वैज्ञानिक दृष्टि तथा वैज्ञानिक उपकरणों के प्रयोगों का पता चलता है। प्राचीन काल में चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में चरक और सुश्रुत, खगोल विज्ञान व गणित के क्षेत्र में आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और आर्यभट्ट द्वितीय और रसायन विज्ञान में नागार्जुन की खोजों का बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान है। इनकी खोजों का प्रयोग आज भी किसी-न-किसी रूप में हो रहा है।

आज विज्ञान का स्वरूप काफी विकसित हो चुका है। पूरी दुनिया में तेजी से वैज्ञानिक खोजें हो रही हैं। इन आधुनिक वैज्ञानिक खोजों की दौड़ में भारत के जगदीश चंद्र बसु, प्रफुल्ल चंद्र राय, सी. वी. रमन, सत्येंद्रनाथ बोस, मेघनाथ साहा, प्रशांतचंद्र महाललोबिस, श्रीनिवास रामानुजम, हरगोविंद खुराना आदि का वनस्पति, भौतिकी, गणित, रसायन, यांत्रिकी, चिकित्सा विज्ञान, खगोल विज्ञान आदि क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान है।

भारतीय विज्ञान : विकास के विभिन्न चरण तथा उपलब्धियाँ
======================================

भारतीय विज्ञान का विकास प्राचीन समय में ही हो गया था। अगर यह कहा जाए कि भारतीय विज्ञान की परंपरा दुनिया की प्राचीनतम परंपरा है, तो अतिशयोक्ति न होगी। जिस समय यूरोप में घुमक्कड़ जातियाँ अभी अपनी बस्तियाँ बसाना सीख रही थीं, उस समय भारत में सिंध घाटी के लोग सुनियोजित ढंग से नगर बसा कर रहने लगे थे। उस समय तक भवन-निर्माण, धातु-विज्ञान, वस्त्र-निर्माण, परिवहन-व्यवस्था आदि उन्नत दशा में विकसित हो चुके थे। फिर आर्यों के साथ भारत में विज्ञान की परंपरा और भी विकसित हो गई। इस काल में गणित, ज्योतिष, रसायन, खगोल, चिकित्सा, धातु आदि क्षेत्रों में विज्ञान ने खूब उन्नति की। विज्ञान की यह परंपरा ईसा के जन्म से लगभग 200वर्ष पूर्व से शुरू होकर ईसा के जन्म के बाद लगभग 11वीं सदी तक काफी उन्नत अवस्था में थी। इस बीच आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त, बोधयन, चरक, सुश्रुत, नागार्जुन, कणाद से लेकर सवाई जयसिंह तक वैज्ञानिकों की एक लंबी परंपरा विकसित हुई।

मधयकाल यानी मुगलों के आने के बाद देश में लगातार लड़ाइयाँ चलती रहने के कारण भारतीय वैज्ञानिक परंपरा का विकास थोड़ा रुका अवश्य, किंतु प्राचीन भारतीय विज्ञान पर आधरित ग्रंथों के अरबी-फारसी में खूब अनुवाद हुए। यह एक महत्त्वपूर्ण चरण था, जिसका परिणाम हुआ कि भारतीय वैज्ञानिक परंपरा दूर देशों तक पहुँची जिसने सभी को प्रभावित किया। भारतीय वैज्ञानिक परंपरा के विकास का यह एक नया आयाम था। दूसरे देशों की वैज्ञानिक परंपराओं के साथ मिलकर इसने नया रूप ग्रहण किया।

मुगल शासन के बाद जब अंग्रेजी शासन स्थापित हुआ तो भारत में एक बार फिर से विज्ञान की परंपरा तेजी से विकास की ओर उन्मुख हुई। अब तक विभिन्न संस्कृतियों के साथ मिलकर भारतीय वैज्ञानिक परंपरा काफी प्रौढ़ हो चुकी थी। अंग्रेजी शासन के दौरान ज्ञान-विज्ञान के विविध स्रोत और संसाधन विकसित हुए, जिस कारण यहाँ की वैज्ञानिक परंपरा को विकसित होने के लिए खूब उर्वर भूमि प्राप्त हुई और इसने विविध क्षेत्रों में उपलब्धियाँ हासिल की।
=============================

www.vaidiksanskrit.com

===============================
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(१.) वैदिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/vaidiksanskrit
(२.) वैदिक साहित्य और छन्द
www.facebook.com/vedisanskrit
(३.) लौकिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/laukiksanskrit
(४.) संस्कृत निबन्ध
www.facebook.com/girvanvani
(५.) संस्कृत सीखिए--
www.facebook.com/shishusanskritam
(६.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(७.) संस्कृत-हिन्दी में कथा
www.facebook.com/kathamanzari
(८.) संस्कृत-काव्य
www.facebook.com/kavyanzali
(९.) आयुर्वेद और उपचार
www.facebook.com/gyankisima
(१०.) भारत की विशेषताएँ--
www.facebook.com/jaibharatmahan
(११.) आर्य विचारधारा
www.facebook.com/satyasanatanvaidi
(१२.) हिन्दी में सामान्य-ज्ञान
www.facebook.com/jnanodaya
(१३.) संदेश, कविताएँ, चुटकुले आदि
www.facebook.com/somwad
(१४.) उर्दू-हिन्दी की गजलें, शेर-ओ-शायरी
www.facebook.com/dilorshayari
(१५.) सूक्ति-सुधा
www.facebook.com/suktisudha
(१६.) आर्यावर्त्त-गौरवम्
www.facebook.com/aryavartgaurav
(१७.) संस्कृत नौकरी
www.facebook.com/sanskritnaukari
हमारे समूहः---
(१.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(२.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(३.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(४.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(५.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(६.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(७.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(८.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(९.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(१०.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(११.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(१२.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(१३) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(१४.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik
(१५.) गीर्वाणवाणी
https://www.facebook.com/groups/girvanvani
(१६) वीरभोग्या वसुन्धरा
https://www.facebook.com/groups/virbhogya
(१७.) चाणक्य नीति को पसन्द करने वाले मित्र
https://www.facebook.com/groups/chaanakyaneeti/
(१८.) वैदिक संस्कृत मित्र
https://www.facebook.com/groups/vedicsanskrit/
(१९.) कुसुमाञ्जलिः
https://www.facebook.com/groups/kusumanjali/
(२०.) संस्कृत नौकरी 
https://www.facebook.com/groups/sanskritnaukari
(२१.) सूक्ति-सूधा
https://www.facebook.com/groups/suktisudha/
 हमारे ब्लॉग
(१.) वैदिक संस्कृत
www.vaidiksanskrit.blogspot.in/
(२.) वैदिक संस्कृत
www.vediksanskrit.blogspot.in/
(३.) लौकिक संस्कृत
www.laukiksanskrit.blogspot.in/
(४.) चाणक्य नीति
www.chaanakyaniti.blogspot.in/
(५.) आर्य सिद्धान्त
www.aryasiddhant.blogspot.in/
(६.) संस्कृत नौकरी
www.sanskritnaukari.blogspot.in/
(७.) आयुर्वेद
www.aayurvedjivan.blogspot.in/
(८.) कथा-मञ्जरी
www.kathamanzari.blogspot.in/
(९.) सूक्ति-सुधा
www.suktisudha.blogspot.in/
(१०.) जय भारत महान्
www.jaibharatmahan.blogspot.in/
(११.) कुसुमाञ्जलिः
www.kusumanzali.blogspot.in/

भारतीय गणित

!!!---: भारतीय गणित :---!!!
=======================

गणितीय गवेषणा का महत्वपूर्ण भाग भारतीय उपमहाद्वीप में उत्पन्न हुआ है। संख्या, शून्य, स्थानीय मान, अंकगणित, ज्यामिति, बीजगणित, कैलकुलस आदि का प्रारम्भिक कार्य भारत में सम्पन्न हुआ। गणित-विज्ञान न केवल औद्योगिक क्रांति का बल्कि परवर्ती काल में हुईं वैज्ञानिक उन्नति का भी केंद्र बिन्दु रहा है। बिना गणित के विज्ञान की कोई भी शाखा पूर्ण नहीं हो सकती। भारत ने औद्योगिक क्रांति के लिए न केवल आर्थिक पूँजी प्रदान की वरन् विज्ञान की नींव के जीवंत तत्व भी प्रदान किये जिसके बिना मानवता विज्ञान और उच्च तकनीकी के इस आधुनिक दौर में प्रवेश नहीं कर पाती। विदेशी विद्वानों ने भी गणित के क्षेत्र में भारत के योगदान की मुक्तकंठ से सराहना की है।

गणित का सर्वप्रथम प्रयोग विश्व के प्राचीनतम ग्रन्थ वेद में हुआ है । यजुर्वेद में भी इसके बारे में कहा गया है ।

भारतीय शास्त्रों में गणित शास्त्र की विवेचना हुई है । महान वैयाकरण पाणिनि ने गणित के अनेक शब्दों की सूक्ष्म विवेचना की है। उन्होंने उस समय की आवश्यकतानुसार प्रतिशत के स्थान पर मास में देय ब्याज के लिये एक ‘प्रतिदश’ अनुपात का उल्लेख किया है (कुसीददशैकादशात् ष्ठन्ष्ठचौ (पा.सा. 4.4.31))। चक्रवृद्धि ब्याज द्वारा सर्वाधिक बढ़ी हुई रकम को ‘महाप्रवृद्ध’ बताया है। तोल, माप, सिक्के, पण्य द्रव्य के सैकड़ो शब्दों के वर्णन के अन्तर्गत त्रैराशिक नियम की सूचना दी है।

दर्शनशास्त्र में वेदान्त में अध्यारोप अपवाद के सिद्धान्त बीजगणितीय समीकरण या अंकगणित के ‘इष्टकर्म’ के समकक्ष हैं। न्याय शास्त्र की अनुमान या तर्कविद्या सर्वथा गणितीय नियमों से संचालित है।

ई. पू. दूसरी शती में पिंगल विरचित छन्दशास्त्र में छन्दों के विभेद को वर्णित करने वाला ‘मेरुप्रस्तार’ पास्कल के त्रिभुज से तुलनीय बनता है। वेदों के क्रमपाठ, घनपाठ आदि में गणित के श्रेणी-व्यवहार के तत्त्व वर्तमान हैं।

गणित में भारत का योगदान
=======================

(१) अंकगणित : दाशमिक प्रणाली (Decimal system), ऋण संख्याएँ (Negative numbers) , शून्य , द्विक संख्या प्रणाली (Binary numeral system), स्थानीय मान पर आधारित संख्या आधुनिक संख्या निरूपण, फ्लोटिंग पॉइंट संख्याएँ, संख्या सिद्धान्त, अनन्त (Infinity) , टांसफाइनाइट संख्याएँ (Transfinite numbers), अपरिमेय संख्याएँ ।

(२) भूमिति अर्थात भूमि मापन का शास्त्र : वर्गमूल, घनमूल,, पाइथागोरीय त्रिक , ट्रांसफॉर्मेशन , पास्कल त्रिकोण

(३) बीजगणित: द्विघात समीकरण , त्रिघात समीकरण और चतुर्घात समीकरण (biquadratic equations)

(४) गणितीय तर्कशास्त्र (लॉजिक): Formal grammars, formal language theory, Recursion

(५) सामान्य गणित: Fibonacci numbers , मोर्स कोड का प्राचीनतम रूप , लघुगणक, घातांक, कलन विधि , अल्गोरिज्म (Algorism) ।

(६) त्रिकोणमिति: त्रिकोणमितीय फलन, त्रिकोणमितीय श्रेणी ।

(७) कैलकुलस : आर्यभट की ज्या सारणी, माधव की ज्या सारणी, तथा केरलीय गणित सम्प्रदाय द्वारा किये गये कार्य अत्यन्त महत्वपूर्ण, मौलिक और न्यूटन आदि से कई सौ वर्ष पहले के हैं।
=============================

www.vaidiksanskrit.com

===============================
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(१.) वैदिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/vaidiksanskrit
(२.) वैदिक साहित्य और छन्द
www.facebook.com/vedisanskrit
(३.) लौकिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/laukiksanskrit
(४.) संस्कृत निबन्ध
www.facebook.com/girvanvani
(५.) संस्कृत सीखिए--
www.facebook.com/shishusanskritam
(६.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(७.) संस्कृत-हिन्दी में कथा
www.facebook.com/kathamanzari
(८.) संस्कृत-काव्य
www.facebook.com/kavyanzali
(९.) आयुर्वेद और उपचार
www.facebook.com/gyankisima
(१०.) भारत की विशेषताएँ--
www.facebook.com/jaibharatmahan
(११.) आर्य विचारधारा
www.facebook.com/satyasanatanvaidi
(१२.) हिन्दी में सामान्य-ज्ञान
www.facebook.com/jnanodaya
(१३.) संदेश, कविताएँ, चुटकुले आदि
www.facebook.com/somwad
(१४.) उर्दू-हिन्दी की गजलें, शेर-ओ-शायरी
www.facebook.com/dilorshayari
(१५.) सूक्ति-सुधा
www.facebook.com/suktisudha
(१६.) आर्यावर्त्त-गौरवम्
www.facebook.com/aryavartgaurav
(१७.) संस्कृत नौकरी
www.facebook.com/sanskritnaukari
हमारे समूहः---
(१.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(२.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(३.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(४.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(५.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(६.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(७.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(८.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(९.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(१०.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(११.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(१२.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(१३) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(१४.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik
(१५.) गीर्वाणवाणी
https://www.facebook.com/groups/girvanvani
(१६) वीरभोग्या वसुन्धरा
https://www.facebook.com/groups/virbhogya
(१७.) चाणक्य नीति को पसन्द करने वाले मित्र
https://www.facebook.com/groups/chaanakyaneeti/
(१८.) वैदिक संस्कृत मित्र
https://www.facebook.com/groups/vedicsanskrit/
(१९.) कुसुमाञ्जलिः
https://www.facebook.com/groups/kusumanjali/
(२०.) संस्कृत नौकरी 
https://www.facebook.com/groups/sanskritnaukari
(२१.) सूक्ति-सूधा
https://www.facebook.com/groups/suktisudha/

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

वैदिक सभ्यता, सिन्धु सभ्यता आर्य सभ्यता

!!!---: वैदिक सभ्यता, सिन्धु सभ्यता आर्य सभ्यता :---!!!
========================================


पूरे संसार में ऐसी कोई सभ्यता नहीं, जैसी आर्यों की सभ्यता थी । आइए जानें आर्यों की विशाल सभ्यता.......

सिन्धु घाटी की सभ्यता प्रमुख रूप से नगर सभ्यता थी । एक निश्चित योजना के अनुसार नगर बनवाए गए थे । भवनों का निर्माण ४०x 20x 10 और ३०x १५x ७.५ सेंटीमीटर आकार वाली पकाई हुई ईंटों से किया गया था ।



सडकें ९ फीट से ३४ फीट तक चौडी थीं, जो परस्पर समकोण पर काटती थीं । गन्दे पानी की निकासी के लिए पक्की ईंटों से बनी नालियों की यथोचित व्यवस्था थी । प्रायः सभी घरों में आँगन और स्नानागार होता था । आँगन के ही एक ओर पाकशाला (रसोईघर)  की व्यवस्था थी, भवन द्वार मुख्य सडक पर न होकर पीछे की ओर गली में हुआ करते थे ।



मोहनजोदडों से प्राप्त भग्नावशेषों में एक विशाल स्नानागार उल्लेखनीय है । ईंटों के स्थापत्य का यह सुन्दर उदाहरण है । यह ११.८८ मीटर लम्बा, ७.०१ मीटर चौडा और २.४३ मीटर गहरा है । स्नानकुण्ड के दोनों सिरों पर प्रवेश के लिए तल तक सीढियाँ हैं । पास ही कुण्ड में जल भरने के लिए कुआँ है । जल निकासी के लिए नाली भी है ।



इस सभ्यता के अन्तर्गत पंजाब, सिन्ध और बलुचिस्तान के भाग ही नहीं, बल्कि गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सीमान्त भाग भी थे । इसका फैलाव उत्तर में जम्मू से लेकर दक्षिण में नर्मदा के मुहाने तक और पश्चिम में मकरान समुद्र तट से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ तक था ।



अब तक भारत वर्ष नामक इस उपमहाद्वीप में इस सभ्यता के लगभग १,००० स्थानों का पता लग चुका है ।

हडप्पा और मोहनजोदडों के अलावा तीसरा नगर सिन्ध में ही मोहनजोदडों से १३० किलोमीटर दक्षिण में "चन्हुदडो" स्थल पर था । चौथा नगर गुजरात में खंभात की खाडी के ऊपर भोगवर नदी के किनारे स्थित "लोथल" है । पाँचवाँ नगर राजस्थान के घाघरा नदी (प्राचीन नाम सरस्वती) के किनारे "कालीबंगा" में स्थित था । छठा नगर हरियाणा के हिसार जिले में स्थित "बणावली" था । इन छहों स्थान पर परिपक्व और उन्नत सिन्धु घाटी सभ्यता के दर्शन होते हैं । बलूचिस्तान में "सुतकोगेंडोर" और महाराष्ट्र में भी "सुरकोतडा" में यह सभ्यता परिपक्व अवस्था में देखी गई है ।



गुजरात के काठियावाड प्रायद्वीप में "रंगपुर" और "रोजडी" हैं । अन्य प्रमुख सिन्धु घाटी के सभ्यता स्थलों में रोपड (पंजाब), आलमगीर (पश्चिम उत्तर प्रदेश) , अली मुराद और कोट दीजी (सिन्ध पाकिस्तान) प्रमुख हैं ।

हडप्रा सभ्यता से पूर्व भी यह देश सभ्य था और इसकी एक विकसित सभ्यता थी । यह सभ्यता आर्यों की सभ्यता थी । ये आर्य वेद के अनुयायी थे ।

जो लोग ( अंग्रेज और पाश्चात्य विचारधारा वाले काले भारतीय अंग्रेज) हडप्पा सभ्यता को मिश्र, स्याम देश, असीरिया, वैविलोन आदि देशों की सभ्यता से उधार ली हुई सभ्यता मानते हैं , उनकी जडें हिल गई हैं ।
==============================

www.vaidiksanskrit.com

===============================
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(१.) वैदिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/vaidiksanskrit
(२.) वैदिक साहित्य और छन्द
www.facebook.com/vedisanskrit
(३.) लौकिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/laukiksanskrit
(४.) संस्कृत निबन्ध
www.facebook.com/girvanvani
(५.) संस्कृत सीखिए--
www.facebook.com/shishusanskritam
(६.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(७.) संस्कृत-हिन्दी में कथा
www.facebook.com/kathamanzari
(८.) संस्कृत-काव्य
www.facebook.com/kavyanzali
(९.) आयुर्वेद और उपचार
www.facebook.com/gyankisima
(१०.) भारत की विशेषताएँ--
www.facebook.com/jaibharatmahan
(११.) आर्य विचारधारा
www.facebook.com/satyasanatanvaidi
(१२.) हिन्दी में सामान्य-ज्ञान
www.facebook.com/jnanodaya
(१३.) संदेश, कविताएँ, चुटकुले आदि
www.facebook.com/somwad
(१४.) उर्दू-हिन्दी की गजलें, शेर-ओ-शायरी
www.facebook.com/dilorshayari
(१५.) सूक्ति-सुधा
www.facebook.com/suktisudha
(१६.) आर्यावर्त्त-गौरवम्
www.facebook.com/aryavartgaurav
(१७.) संस्कृत नौकरी
www.facebook.com/sanskritnaukari
हमारे समूहः---
(१.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(२.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(३.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(४.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(५.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(६.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(७.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(८.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(९.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(१०.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(११.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(१२.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(१३) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(१४.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik
(१५.) गीर्वाणवाणी
https://www.facebook.com/groups/girvanvani
(१६) वीरभोग्या वसुन्धरा
https://www.facebook.com/groups/virbhogya
(१७.) चाणक्य नीति को पसन्द करने वाले मित्र
https://www.facebook.com/groups/chaanakyaneeti/
(१८.) वैदिक संस्कृत मित्र
https://www.facebook.com/groups/vedicsanskrit/
(१९.) कुसुमाञ्जलिः
https://www.facebook.com/groups/kusumanjali/
(२०.) संस्कृत नौकरी 
https://www.facebook.com/groups/sanskritnaukari
(२१.) सूक्ति-सूधा
https://www.facebook.com/groups/suktisudha/