परिचयः--- भारत देश में सबसे पुरानी कम्पनी हैं हिन्दुस्तान लीवर लिमिटेड Hindustan Uniliver Limited। यह 1947 में आजादी के पहले से ही भारत लूट मचा रही है । अंग्रेजों के सबसे बडे चापलूस जवाहरलाल ने इसे देश से नहीं भगाया । अंग्रेजों से पैसे खाकर इसे देश में ही लूट मचाने के लिए छूट दे दी । कुछ व्यक्तियों को इसके हिन्दुस्तानी नाम से ऐसा लगता हैं कि ये हिन्दुस्तान की कम्पनी हैं। इस कम्पनी की असलियत यह है कि यह विदेशी कम्पनी हैं। यह अमेरिका की कम्पनी हैं। इसका असली नाम Uniliver हैं। इसके हमारे देश में बहुत से उत्पाद आते हैं। जैसेः---सर्फ,साबुन, शैम्पु, प्यूरी फायर आदि । इस कम्पनी का एक साबुन हैं, लाइफ वाय Life bouy. इस साबुन का टीवी पर भी विज्ञापन आता हैं। आप यह सोचते होंगे की यह देशी साबुन हैं, लेकिन आपको बता दें कि यह विदेशी साबुन है । यह बहुत ही घटिया साबुन है ।
मैं आपको पहले साबुन के प्रकारों के बारे में बता देता हूँ, साबुन तीन प्रकार का होता हैंः--
१.नहाने का साबुन Bathsoap,
२.हाथ धोने का साबुन Toiletsoap,
३.जानवरों के नहाने का साबुन Carbolicsoap.
१.नहाने का साबुन Bathsoap,
२.हाथ धोने का साबुन Toiletsoap,
३.जानवरों के नहाने का साबुन Carbolicsoap.
हकीकत क्या हैं ?
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यह कम्पनी खुद कहती हैं कि हमारा साबुन Carbolicsoap हैं। मतलब यह साबुन जानवरों के नहाने का हैं। इस साबुन से विदेशों में जानवरों को निहलाया जाता हैं।(जैसे-कुत्ता, बिल्ली, सूअर, आदि) और हमारे देश में इस साबुन से इंसान नहाते हैं।
हर कम्पनी सबसे पहले नहाने का साबुन Bathsoap बनाती हैं, फिर उसके बाद हाथ धोने का साबुन Toiletsoap बनाती हैं। इन दोनों साबुन को बनाने के बाद जो कचरा बचता हैं, उससे जानवरों के नहाने का साबुन Carbolic बनाया जाता हैं।
हर कम्पनी सबसे पहले नहाने का साबुन Bathsoap बनाती हैं, फिर उसके बाद हाथ धोने का साबुन Toiletsoap बनाती हैं। इन दोनों साबुन को बनाने के बाद जो कचरा बचता हैं, उससे जानवरों के नहाने का साबुन Carbolic बनाया जाता हैं।
इसी कम्पनी का डिटौल भी आता है । इसे आप बन्द कर दें । इसके स्थान पर पतञ्जलि का उत्पाद खरीद सकते हैं ।
यह कम्पनी हर साल हमारे देश में लगभग 40,00,000,00 चालीस करोड़ साबुन बेच देती हैं। एक साबुन कम्पनी को लगभग 1.5-2 रुपये का पड़ता हैं और यह इसे हमारे देश में 10 रुपये का बेचती हैं। कभी-कभी तो 12 रुपये का बेचती हैं। इस कम्पनी का एक सर्फ भी आता हैं, वो कम्पनी को करीब 19-20 रुपये किलो में बनने के बाद पड़ता हैं और यह कम्पनी उसे करीब 150 रुपये किलो में बेचती हैं।
अब आपको पता चल ही गया होगा कि ये विदेशी कम्पनी हमारे देश को कैसे लूट रही हैं।
इस कम्पनी की हमारे देश में बिक्री 1998 में 14,000,00,000,00 चौदह हजार करोड़ थी। लेकिन 2008 में इनकी बिक्री घटकर करीब 9,800,00,000,00 नौ हजार आठ सौ करोड़ रह गयी।
इसका सीधा सीधा मतलब यह हैं कि हमारे देश में इस कम्पनी की बिक्री घटी हैं। अगर आप सब लोगों ने इन विदेशी कम्पनियों का इसी तरह से उपयोग करना बन्द कर दिया तो हमारे देश में वो दिन दूर नहीं जब हमारे देश में सब लोग स्वदेशी को अपनाने लगेंगे और स्वदेशी का झण्डा लहरायेगा।
अगर आप सच्चे हिन्दुस्तानी हैं, तो आप भी इस कम्पनी के उत्पाद खरीदना बन्द कर दीजिए ।
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