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गुरुवार, 21 जनवरी 2016

FACEBOOK डायन



FACEBOOK का घोटाला
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फेसबुक की तरफ से सभी यूजर्स को एक मैसेज भेजा गया कि फ्री बेसिक्स पर उसे समर्थन दें । मेरे पास भी कई बार मैसेज आया कि आपके साथियों ने इसे समर्थन किया है, आप भी करें । मैं इसके बारे में विस्तार से जानना चाहता था कि आखिर ये है किस चिडिया का नाम । इसलिए मैंने समर्थन अभी तक नहीं किया । अब जबकि मैंने इसके बारे में ढेरों जानकारियाँ इकट्ठी कर ली है । तो मैं चाहता हूँ कि आप इसे जाने कि फेसबुक ने कितना बडा घोटाला किया है भारत देश ।

इतिहास गवाह है कि 18 वीं शताब्दी से ही यूरोपीय लोग हमें मूर्ख बनाते आ रहे हैं । हमें मूर्ख बनाकर हमारे ऊपर शासन किया । ये अब भी हमारे नासमझ नेताओं को बेवकूफ बनाकर राज्य कर रहे हैं । इन्हीं बातों में एक बात है फ्री बेसिक्स की बात ।

शुरु में सुनने में बडा मजा आता है कि अब फेसबुक फ्री में देख सकेंगे । लेकिन क्या आपको पता है कि आपको इसके माध्यम से गुलाम बनाया जा रहा है ।

फ्री बेसिक्स का मायाजालः---
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फेसबुक के मुख्याधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने फ्री बेसिक्स का प्रस्ताव रखा है । इसने रिलायंस कम्युनिकेशसन्स के साथ मिलकर लोगों को फ्री इण्टरनेट सेवा देने का वायदा किया है ।

इस सेवा के द्वारा गिनी हुई साइटों को खोला जा सकेगा , अर्थात् चिह्नित साइट के अतिरिक्त आप अन्य साइट नहीं देख सकेंगे । जैसे--फेसबुक को खोला जा सकेगा, किन्तु गुगल पर सर्च नहीं कर सकेंगे । अन्य साइट खोलने के लिए आपको मूल्य चुकाना पडेगा ।

इस प्रस्ताव के समर्थन में यह कहा जा रहा है कि आम लोगों तक इण्टरनेट पहुँचाया जाएगा । जो लोगों को नहीं दिख रहा है, वही घोटाला यहाँ किया जा रहा है । कि लोगों को नशा करा दो, फिर वे स्वयं पैसे खर्च करेंगे । पहली नजर में यह भोला प्रस्ताव लगता है, लेकिन है सौ फीसदी धोखा । इसका दीर्घकालीन खामियाजा भारतीयों को भुगतना पडेगा ।

छुट देने के पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि ग्राहक जिन वेबसाइट पर जा सकेगा, यह इण्टरनेट कम्पनी तय करेगी कि ग्राहक क्या देखे । यही सबसे बडा प्रतिबन्ध है । यह उसी प्रकार हुआ कि अखबार का विक्रेता तय करे कि आपके घर में कौन-सा अखबार आए । आप स्वयं तय नहीं करेंगे कि आपके पास कौन-सा अखबार आएगा । इस फ्री बेसिक्स से कम्पनी यह तय करेगी कि आप कौन-सी साइट देखें । आप इस मामले में गुलाम हो जाएगे और फेसबुक इस कानून से कम्पनी से पैसे कमायेगी ।

आपके विचार का निर्धारण आपके विवेक पर नहीं होगा, बल्कि फेसबुक द्वारा निर्धारित होगा । जैसे आपको सूचना न मिले कि कोई मन्त्री भ्रष्टाचार के मामले में जेल गया था तो आप उसे ईमानदार समझेंगे । अतः फेसबुक को विशेष वेबसाइट को फ्री करने का अधिकार देने से दूसरी इण्टरनेट कम्पनियों द्वारा भी विशेष वेबसाइटों को ब्लाक करके जनता के विचारों को विशेष (निर्धारित) दिशा में ढकेला जा सकेगा । यानि कि कोई दंगा करवाना हो या गुमराह कराना हो तो फेसबुक इस कार्य में सफल हो जाएगी ।

आज युग सूचना का युग है । सूचना के अधिकार के अन्तर्गत जनता को सक्षम बनाया गया है । फ्री बेसिक्स आपके अधिकार का हनन करता है । निजी कम्पनियाँ विशेष प्रकार की सूचना परोसकर आपके दिमाग को तोड-मरोड सकेगी ।

देखिये ये देश सावधान है । हमारे नेता मूर्ख बन रहे हैं । चिली, नीदरलैण्ड तथा स्लोवेनिया ने पूर्व में ही कानून बनाए हैं कि इण्टरनेट कम्पनियाँ सूचना के प्रवाह में किसी भी प्रकार का दखल नहीं करेंगी , जैसेै बिजली सप्लाई करने वाली कम्पनी दखल नहीं करती है कि बिजली का उपयोग आप किस प्रकार से करते हैं । पंखा चलाने में, हीटर चलाने में , मशीन चलाने में या फिर कुलर-एसी चलाने में ।

मार्क जुकरबर्ग देश को भ्रमित कर रहा है । उसका उद्देश्य ग्राहकों को माल परोसकर अपने शिकंजे में जकड लेना है, फँसा लेना है, जैसे अफीम एवं चाय कम्पनियाँ शुरु में जनता फ्री माल देकर अभ्यस्त कर लेती हैं, बाद गुलाम बनाकर पैसे कमाती हैं । क्या आपको पता है कि भारत में कोई भी व्यक्ति 18 वीं शताब्दी से पूर्व चाय और शराब पीना नहीं जानता था । भारत में बंगाल में पहली बार अंग्रेजों ने फ्री में चाय और शराब लोगों को पिलायी । कुछ लोगों ने पी । बाद में बिक्री शुरु हो गई । आज देखिए हर चौराहे पर , हर नुक्कड पर चाय और शराब की दुकान मिल जाएगी ।

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