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रविवार, 10 जुलाई 2016

ईसाई बेटे ने हिन्दू बाप को मुखाग्नि नहीं दी

यही होगा, जब आप अपने साथ अपने बच्चों मन्दिर नहीं ले जाओगे तो....
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मरने के बाद आपको कोई पूछने वाला नहीं होगा,, अन्तिम संस्कार कौन करेगा..?.???
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कहते हिन्दुओं में पुत्र पिता को नरक से तार देता है,.....क्या ऐसा पुत्र आपको चाहिए....?????????????
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यदि नहीं तो.....

उन्हें वैदिक संस्कार दीजिए.....

उन्हें अपना लीजिए....वे आपके पुत्र हैं.....

मुसलमानों और ईसाइयों के लिए मत छोड दीजिए.....

पुत्र हो चाहे पुत्री.................
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तेलंगाना के वारंगल जिले में एक हिंदू शख्स की मौत के बाद मुस्लिम महिला ने उनके अंतिम संस्कार का फर्ज निभाया। और मृतक के बेटे ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया ।

मुसलमान याकूब बाई अपने पति के साथ वृद्धाश्रम चलाती हैं, वह अपने वृद्धाश्रम में लगभग 70 बुजुर्गों की मुफ्त में देखभाल करती हैं। मंगलवार की रात उनके आश्रम में रहने वाले 70 वर्षीय के. श्रीनिवास की मौत हो गई। श्रीनिवास दो साल पहले एक बस स्टॉप पर लकवे की हालत में मिले थे याकूब बाई को मिले थे। उन्होंने याकूब बाई से बताया था कि उनके घर वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया है। वह पेशे से दर्जी काम करते थे।

श्रीनिवास की मौत हो जाने के बाद याकूब ने उनके बेटे सारथ का पता लगाया। सारथ उनके अंतिम संस्कार में आया पर उन्होंने कहा कि उसने ईसाई धर्म स्वीकार किया है इस वजह से वह हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार नहीं कर सकता है।

याकूब के पति उस समय घर पर नहीं थे इसलिए श्रीनिवास को पिता की तरह मानने वाली याकूब बाई ने हिन्दू रीती रिवाज से अंतिम संस्कार किया। याकूब ने चिता के चारों ओर घूम कर, कंधे पर घड़ा रखकर अंतिम विधि की परंपरा के अनुसार श्रीनिवास के शरीर को अग्निदाह दिया।


सम्हल जाओ हिन्दुओ.......


यही समय है प्यारे...............
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